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चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 39

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 39चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 39

191 : - अपने से अधिक शक्तिशाली और समान बल वाले से शत्रुता न करे। 192 : - मंत्रणा को गुप्त रखने से ही कार्य सिद्ध होता है। 193 :

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 38

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 38चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 38

186 : - अर्थ, धर्म और कर्म का आधार है। 187 : - शत्रु दण्डनीति के ही योग्य है। 188 : - कठोर वाणी अग्निदाह से भी अधिक तीव्र दुःख पहुंचाती है।

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 37

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 37चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 37

181 : - दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है। 182 : - किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें। 183 : - चंचल चित वाले

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 36

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 36चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 36

176 : - सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है। 177 : - ढेकुली नीचे सिर झुकाकर

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 35

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 35चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 35

171 : - शत्रु के गुण को भी ग्रहण करना चाहिए। 172 : - अपने स्थान पर बने रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है। 173 : - सभी प्रकार

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 34

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 34चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 34

166 : - आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें, वह सदा दुःख ही देता है। 167 : -

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 33

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 33चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 33

161 : - यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए। 162 : - यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए।

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 30

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 30चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 30

156 : - आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है। 157 : - मित्रों के संग्रह से बल प्राप्त होता है। 158 : - जो धैर्यवान नहीं है,

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 31

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 31चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 31

152 : - वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है। 153 : - शत्रु की दुर्बलता

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 30

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 30चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 30

146 : - चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह वेश्या धन के समाप्त होने पर पुरुष से मुँह मोड़ लेती है। उसी तरह जब राजा शक्तिहीन हो जाता है तो