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चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 50

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 50चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 50

246 : - आलसी राजा की प्रशंसा उसके सेवक भी नहीं करते। 247 : - शक्तिशाली राजा लाभ को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है। 248 : - राज्यतंत्र को

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 49

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 49चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 49

241 : - छः कानो में पड़ने से (तीसरे व्यक्ति को पता पड़ने से) मंत्रणा का भेद खुल जाता है। 242 : - अप्राप्त लाभ आदि राज्यतंत्र के चार आधार

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 48

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 48चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 48

236 : - भविष्य के अन्धकार में छिपे कार्य के लिए श्रेष्ठ मंत्रणा दीपक के समान प्रकाश देने वाली है। 237 : - मंत्रणा के समय कर्त्तव्य पालन में कभी

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 47

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 47चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 47

231 : - विचार अथवा मंत्रणा को गुप्त न रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है। 232 : - लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है। 233 : -

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 46

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 46चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 46

226 : - सुख और दुःख में समान रूप से सहायक होना चाहिए। 227 : - स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों को सम्मुख रखकर दोबारा उन पर विचार करे। 228 :

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 45

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 45चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 45

221 : - एक अकेला पहिया नहीं चला करता। 222 : - सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए। 223 : - स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों कोसम्मुख

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 44

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 44चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 44

216 : - जहां लक्ष्मी (धन) का निवास होता है, वहां सहज ही सुख-सम्पदा आ जुड़ती है। 217 : - इन्द्रियों पर विजय का आधार विनर्मता है। 218 : -

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 43

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 43चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 43

211 : - प्रकृति (सहज) रूप से प्रजा के संपन्न होने से नेताविहीन राज्य भी संचालित होता रहता है। 212 : - वृद्धजन की सेवा ही विनय का आधार है।

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 42

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 42चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 42

206 : - कल का कार्य आज ही कर ले। 207 : - सुख का आधार धर्म है। 208 : - धर्म का आधार अर्थ अर्थात धन है। 209 :

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 41

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 41चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 41

201 : - आग में आग नहीं डालनी चाहिए। अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए। 202 : - मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान