चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 45

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 45
221 : - एक अकेला पहिया नहीं चला करता।

222 : - सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।

223 : - स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों कोसम्मुख रखकर दुबारा उन पर विचार करे।

224 : - अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।

225 : - शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

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