चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 31

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 31
152 : - वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।
153 : - शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।
154 : - सिंह भूखा होने पर भी तिनका नहीं खाता। 
155 : - एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र होते है।

Also, Read
Swami Vivekananda
Good Morning
Chanakya Niti

chanakya thoughts success

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 5

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 5

chanakya video 21 :- अतिथि का सत्कार न करने वाला, थके-हारे को आश्रय न देने वाला और दूसरे का हिस्सा हड़प करने वाला, ये सब लोग महापापी होते हैं, 21

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 20

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 20

96 : - गुणी व्यक्ति भी आश्रय नहीं मिलने पर दुःखी हो जाता है, क्योंकि निर्दोष मणि को भी आश्रय की आवश्यकता होती है. 96 : - gunee vyakti bhee

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 14

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 14

chanakya video 66 : - जिस प्रकार अकेला चंद्रमा रात कि शोभा बढ़ा देता है, ठीक उसी प्रकार एक अकेला विद्वान पुत्र कुल को निहाल कर देता है. 66 :