Category: chanakya niti

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 151

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 151चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 151

751 : - ज्ञानी पुरुषों को संसार का भय नहीं होता। 751 : - gyaanee purushon ko sansaar ka bhay nahin hota. 752 : - जन्म-मरण में दुःख ही है।

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 149

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 149चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 149

741 : - प्रजाप्रिय राजा लोक-परलोक का सुख प्रकट करता है। 741 : - prajaapriy raaja lok-paralok ka sukh prakat karata hai. 742 : - मनुष्य के चेहरे पर आए

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 148

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 148चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 148

736 : - कूट साक्षी नहीं होना चाहिए। 736 : - koot saakshee nahin hona chaahie. 737 : - झूठी गवाही देने वाला नरक में जाता है। 737 : -

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 147

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 147चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 147

731 : - तत्त्वों का ज्ञान ही शास्त्र का प्रयोजन है। 731 : - tattvon ka gyaan hee shaastr ka prayojan hai. 732 : - कर्म करने से ही तत्त्वज्ञान

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 145

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 145चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 145

721 : - बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते। 721 : - buddhimaanon ke shatru nahin hote. 722 : - दान जैसा कोई वशीकरण मन्त्र नहीं है। 722 : - daan

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 143

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 143चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 143

711 : - असहाय पथिक बनकर मार्ग में न जाएं। 711 : - asahaay pathik banakar maarg mein na jaen. 712 : - पुत्र की प्रशंसा नहीं करनी चाहिए। 712

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 142

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 142चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 142

706 : - विश्वासघाती की कहीं भी मुक्ति नहीं होती। 706 : - vishvaasaghaatee kee kaheen bhee mukti nahin hotee. 707 : - दैव (भाग्य) के अधीन किसी बात पर