चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 58

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 58

286 : - निर्बल राजा की आज्ञा की भी अवहेलना कदापि नहीं करनी चाहिए।
286 : - nirbal raaja kee aagya kee bhee avahelana kadaapi nahin karanee chaahie.
287 : - अग्नि में दुर्बलता नहीं होती।
287 : - agni mein durbalata nahin hotee.
288 : - दंड का निर्धारण विवेकसम्मत होना चाहिए।
288 : - dand ka nirdhaaran vivekasammat hona chaahie.
289 : - दंडनीति से राजा की प्रवति अर्थात स्वभाव का पता चलता है।
289 : - dandaneeti se raaja kee pravati arthaat svabhaav ka pata chalata hai.
290 : - स्वभाव का मूल अर्थ लाभ होता है।
290 : - svabhaav ka mool arth laabh hota hai.

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