चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 19

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 19
91 : - जो व्यक्ति उत्सव में, दुःख में अकाल पड़ने पर, संकट में, राजदरबार में तथा श्मशान में साथ दें वही सच्चा हितैषी है.

91 : - jo vyakti utsav mein, duhkh mein akaal padane par, sankat mein, raajadarabaar mein tatha shmashaan mein saath den vahee sachcha hitaishee hai. 
92 : - भोज्य पदार्थ, भोजन शक्ति, रति शक्ति, सुन्दर स्त्री, वैभव तथा दान-शक्ति ये सुख किसी अल्प तपस्या का फल नहीं होते. पूर्व जन्म में अखंड तपस्या से ही ऐसा सौभाग्य मिलता है.

92 : - bhojy padaarth, bhojan shakti, rati shakti, sundar stree, vaibhav tatha daan-shakti ye sukh kisee alp tapasya ka phal nahin hote. poorv janm mein akhand tapasya se hee aisa saubhaagy milata hai. 
93 : - जिसका चित स्थिर नहीं होता, उस व्यक्ति को न तो लोगों के बीच में सुख मिलता है न ही वन में. लोगों के बीच में रहने पर उसे उनका साथ जलाता है तथा वन में अकेलापन सताता है.

93 : - jisaka chit sthir nahin hota, us vyakti ko na to logon ke beech mein sukh milata hai na hee van mein. logon ke beech mein rahane par use unaka saath jalaata hai tatha van mein akelaapan sataata hai. 
94 : - भूमि से जल निकालने के लिए जमीं को खोदा जाता है. इसके लिए व्यक्ति को परिश्रम करना पड़ता है. इसी प्रकार गुरु से ज्ञान प्राप्त करने के लिए भी परिश्रम और सेवा करनी पड़ती है.

94 : - bhoomi se jal nikaalane ke lie jameen ko khoda jaata hai. isake lie vyakti ko parishram karana padata hai. isee prakaar guru se gyaan praapt karane ke lie bhee parishram aur seva karanee padatee hai. 
95 : - गुण भी योग्य विवेकशील व्यक्ति के पास जाकर ही सुन्दर लगता है, क्योंकि सोने में जड़ें जाने के बाद ही रत्न सुंदर लगता है.

95 : - gun bhee yogy vivekasheel vyakti ke paas jaakar hee sundar lagata hai, kyonki sone mein jaden jaane ke baad hee ratn sundar lagata hai.

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Chanakya niti चाणक्य नीति

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