चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 18

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 18
86 : - समर्पित स्त्री पति के लिए सुबह में माता, दोपहर में बहन और रात्रि में वेश्या के समान व्यवहार करती है.

86 : - samarpit stree pati ke lie subah mein maata, dopahar mein bahan aur raatri mein veshya ke samaan vyavahaar karatee hai. 
87 : - जो स्त्री पतिव्रता है, प्रेमी है, सत्य बोलती है, पवित्र और चतुर है- वह निश्चित ही वरणीय है. ऐसी स्त्री पाने वाला सचमुच ही सौभाग्यशाली होगा.

87 : - jo stree pativrata hai, premee hai, saty bolatee hai, pavitr aur chatur hai- vah nishchit hee varaneey hai. aisee stree paane vaala sachamuch hee saubhaagyashaalee hoga.
88 : - अग्नि, जल, मूर्ख, सर्प और राजा इनसे निकटता खतरनाक होती है. थोड़ी सी भी असावधानी बरतने से ये प्राण घातक सिद्ध हो सकते है. अतः इनसे सदैव सावधानी बरतनी चाहिए.

88 : - agni, jal, moorkh, sarp aur raaja inase nikatata khataranaak hotee hai. thodee see bhee asaavadhaanee baratane se ye praan ghaatak siddh ho sakate hai. atah inase sadaiv saavadhaanee baratanee chaahie. 
89: - पुरुषों कि अपेक्षा स्त्रियों में आहार दुगुना, बुद्धि चौगुनी, साहस छः गुना और काम भाव आठ गुना बताया गया है.

89: - purushon ki apeksha striyon mein aahaar duguna, buddhi chaugunee, saahas chhah guna aur kaam bhaav aath guna bataaya gaya hai. 
90 : - दान से ही हाथों कि सुन्दरता है न कि कंगन पहनने से. शरीर स्नान से शुद्ध होता है न कि चन्दन लगाने से. तृप्ति मान से होती है न कि भोजन से. मोक्ष ज्ञान से मिलता है न कि श्रृंगार से.

90 : - daan se hee haathon ki sundarata hai na ki kangan pahanane se. shareer snaan se shuddh hota hai na ki chandan lagaane se. trpti maan se hotee hai na ki bhojan se. moksh gyaan se milata hai na ki shrrngaar se.

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