चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 17

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 17
81 : - ब्राह्मण उदरपूर्ति होने पर, सज्जन पराई संपत्ति पर, मोर बादल गरजने पर प्रसन्न होते हैं, लेकिन दुर्जन दूसरों को विपत्ति में देख कर प्रसन्न होते हैं. इनसे सावधान रहना चाहिए.
81 : - braahman udarapoorti hone par, sajjan paraee sampatti par, mor baadal garajane par prasann hote hain, lekin durjan doosaron ko vipatti mein dekh kar prasann hote hain. inase saavadhaan rahana chaahie. 
82 : - स्त्री से सम्बन्ध उसके रजस्वला होने के बाद स्थापित करना श्रेष्ठ मन गया है, क्योंकि रजस्वला होने के बाद स्त्री कुंवारी कन्या सी पुनीत हो जाती है. असमय मैथुन करना न तो नैतिक है और न ही स्वास्थ्य के लिए उचित है.
82 : - stree se sambandh usake rajasvala hone ke baad sthaapit karana shreshth man gaya hai, kyonki rajasvala hone ke baad stree kunvaaree kanya see puneet ho jaatee hai. asamay maithun karana na to naitik hai aur na hee svaasthy ke lie uchit hai.
83 : - शरीर पर तेल लगाने के बाद, श्मशान से लौटने पर, हजामत बनवाने पर और स्त्री-प्रसंग( तुरंत बाद नहीं ) के बाद , जबतक स्नान नहीं किया जाता मनुष्य अपवित्र ही रहता है .स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह उचित है, लेकिन स्त्री-प्रसंग के तुरंत बाद नहाने का निषेध है.
83 : - shareer par tel lagaane ke baad, shmashaan se lautane par, hajaamat banavaane par aur stree-prasang( turant baad nahin ) ke baad , jabatak snaan nahin kiya jaata manushy apavitr hee rahata hai .svaasthy kee drshti se bhee yah uchit hai, lekin stree-prasang ke turant baad nahaane ka nishedh hai. 
84 : - संतानहीन राजा, मंत्र का अज्ञानी साधक और दान के बिना यज्ञ, यह सब मनुष्य को नष्ट कर सकते हैं . इनमें सावधानी रखनी चाहिए.
84 : - santaanaheen raaja, mantr ka agyaanee saadhak aur daan ke bina yagy, yah sab manushy ko nasht kar sakate hain . inamen saavadhaanee rakhanee chaahie. 
85 : - मूर्ख पुत्र, ऋण लेने वाला पिता, सुन्दर पत्नी और व्यभिचारिणी माता के समान दूसरा कोई शत्रु नहीं, इन चारों शत्रुओं के होते मनुष्य घोर कष्ट से गिर जाता है.
85 : - moorkh putr, rn lene vaala pita, sundar patnee aur vyabhichaarinee maata ke samaan doosara koee shatru nahin, in chaaron shatruon ke hote manushy ghor kasht se gir jaata hai.

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hanakya niti चाणक्य नीति

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