चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 5

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 5

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21 :- अतिथि का सत्कार न करने वाला, थके-हारे को आश्रय न देने वाला और दूसरे का हिस्सा हड़प करने वाला, ये सब लोग महापापी होते हैं,
21 :- atithi ka satkaar na karane vaala, thake-haare ko aashray na dene vaala aur doosare ka hissa hadap karane vaala, ye sab log mahaapaapee hote hain, 
22 :- जो व्यक्ति सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता है, दूसरों के धन को मिट्टी के समान समझता है और परस्त्री को माता. वाही सच्चा विद्वान और ब्राह्मण है.
22 :- jo vyakti sabhee praaniyon ke prati samaan bhaav rakhata hai, doosaron ke dhan ko mittee ke samaan samajhata hai aur parastree ko maata. vaahee sachcha vidvaan aur braahman hai. 
23 :- सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.
23 :- siddh- aushadhi ka marm, gupt vaarta, ghar ka bhed, apamaan ki baat, in sabhee ko gupt rakhana hee hitakar hota hain.
24 :- यदि सिंह कि माँद में जाकर देखा जाए तो हो सकता है कि कीमती ‘ गजमुक्ता’ मणि मिल जाए, लेकिन सियार की गुफा में बछड़े कि पूंछ और गधे के चमड़े के अलावा कुछ नहीं मिल सकता. अर्थात् विद्वान पुरुषों की संगति से ज्ञान कि कोई न कोई बात सीखने को अवश्य मिलेगी, लेकिन मूर्ख से कुछ भी नहीं मिल सकता.
24 :- yadi sinh ki maand mein jaakar dekha jae to ho sakata hai ki keematee ‘ gajamukta’ mani mil jae, lekin siyaar kee gupha mein bachhade ki poonchh aur gadhe ke chamade ke alaava kuchh nahin mil sakata. arthaat vidvaan purushon kee sangati se gyaan ki koee na koee baat seekhane ko avashy milegee, lekin moorkh se kuchh bhee nahin mil sakata.
25 :- दिन में दीपक जलना, समुद्र में वर्षा, भरे पेट के लिए भोजन और धनवान को दान देना व्यर्थ है.
25 :- din mein deepak jalana, samudr mein varsha, bhare pet ke lie bhojan aur dhanavaan ko daan dena vyarth hai.

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