चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 3

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 3

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11 : - एक गुण सैकड़ों अवगुणों को छिपा लेता है. जिस प्रकार केवड़ा में कांटे होते है, कीचड़ में पैदा होता है, फिर भी अपनी सुगंध से सबको अपनी और आकर्षित करता है. गुलाब में भी कांटे होते है, लेकिन उसकी मधुर सुगंध उसके इस दोष को ढक लेती है.

11 : - ek gun saikadon avagunon ko chhipa leta hai. jis prakaar kevada mein kaante hote hai, keechad mein paida hota hai, phir bhee apanee sugandh se sabako apanee aur aakarshit karata hai. gulaab mein bhee kaante hote hai, lekin usakee madhur sugandh usake is dosh ko dhak letee hai. 
12 : - अपने रहस्य किसी के सामने भी भूल कर उजागर नहीं करने चाहिए, कुछ तो ऐसे कहे गए हैं, जिन्हें अपनी पत्नी से भी छिपाना चाहिए. अतः यहाँ पर सावधानी बरतनी चाहिए.

12 : - apane rahasy kisee ke saamane bhee bhool kar ujaagar nahin karane chaahie, kuchh to aise kahe gae hain, jinhen apanee patnee se bhee chhipaana chaahie. atah yahaan par saavadhaanee baratanee chaahie. 
13 : - सीधेपन का लोग लाभ उठाते ही हैं. मनुष्य को इतना सरल-हृदयी नहीं होना चाहिए कि हर कोई उसे ठग ले. जंगल में सीधे खड़े वृक्षों को ही काटा जाता है. टेढ़े-मेढ़े वृक्ष बड़े सान से सीना ताने खड़े रहते है.

 13 : - seedhepan ka log laabh uthaate hee hain. manushy ko itana saral-hrdayee nahin hona chaahie ki har koee use thag le. jangal mein seedhe khade vrkshon ko hee kaata jaata hai. tedhe-medhe vrksh bade saan se seena taane khade rahate hai.
14 : - सुख सदैव किसी को नहीं मिलता है, ऐसा कोई प्राणी नहीं है, जो कभी बीमार नहीं होता. कोई कुल निष्कलंक नहीं होता, कोई न कोई दोष निकल ही आता है. अतः हमें परिस्थिति के अनुसार ही आचरण करना चाहिए.

14 : - sukh sadaiv kisee ko nahin milata hai, aisa koee praanee nahin hai, jo kabhee beemaar nahin hota. koee kul nishkalank nahin hota, koee na koee dosh nikal hee aata hai. atah hamen paristhiti ke anusaar hee aacharan karana chaahie. 
15 : - बुरे मित्र का न होना ही अच्छा है , बुरे राजा से सदैव बिना राजा होना अच्छा है, सदाचरण से रहित शिष्यों से शिष्यों का न होना ही अच्छा है और आचरण रहित स्त्री से बिना स्त्री के रहना ही अच्छा कहा गया है.

15 : - bure mitr ka na hona hee achchha hai , bure raaja se sadaiv bina raaja hona achchha hai, sadaacharan se rahit shishyon se shishyon ka na hona hee achchha hai aur aacharan rahit stree se bina stree ke rahana hee achchha kaha gaya hai.

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