एक ही तरीका है | Swami Vivekananda |

एक ही तरीका है |  Swami Vivekananda |

तुम अपनी आत्मा के उददात रूप का ही चिंतन करो।
You contemplate the form of your soul.
tum apanee aatma ke udadaat roop ka hee chintan karo.

 

संभव की सीमा जानने केवल एक ही तरीका है असम्भव से आगे निकल जाना।
The only way to know the extent of possible is to overtake impossible.
sambhav kee seema jaanane keval ek hee tareeka hai asambhav se aage nikal jaana.

 

स्वयं में बहुत सी कमियों के बावजूद अगर में स्वयं से प्रेम कर सकता हुँ तो दुसरो में थोड़ी बहुत कमियों की वजह से उनसे घृणा कैसे कर सकता हुँ।
Despite many shortcomings in itself, if I can love myself, how can I hate them because of some shortcomings in others?
svayan mein bahut see kamiyon ke baavajood agar mein svayan se prem kar sakata hun to dusaro mein thodee bahut kamiyon kee vajah se unase ghrna kaise kar sakata hun.

 

जन्म, व्याधि, जरा और मृत्यु ये तो केवल अनुषांगिक है, जीवन में यह अनिवार्य है, इसिलिये यह एक स्वाभाविक घटना है।
Birth, disease, birth and death are only indispensable, it is mandatory in life, so this is a natural phenomenon.
janm, vyaadhi, jara aur mrtyu ye to keval anushaangik hai, jeevan mein yah anivaary hai, isiliye yah ek svaabhaavik ghatana hai.

 

सुख और दुःख सिक्के के दो पहलु है। सुख जब मनुष्य के पास आता है तो दुःख का मुकुट पहन कर आता है
Joy and sorrow are two aspects of coin. When happiness comes to man, then comes the crown of sorrow
sukh aur duhkh sikke ke do pahalu hai. sukh jab manushy ke paas aata hai to duhkh ka mukut pahan kar aata hai

 

जीवन का रहस्य भोग में नहीं अनुभव के द्वारा शिक्षा प्राप्ति में है।
The secret of life is in receiving education through experience not being experienced.
jeevan ka rahasy bhog mein nahin anubhav ke dvaara shiksha praapti mein hai.

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