चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 140

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 140
696 : - नित्य दूसरे को समभागी बनाए।
696 : - nity doosare ko samabhaagee banae.
697 : - दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।
697 : - diya gaya daan kabhee nasht nahin hota.
698 : - लोभ द्वारा शत्रु को भी भ्रष्ट किया जा सकता है।
698 : - lobh dvaara shatru ko bhee bhrasht kiya ja sakata hai.
699 : - मृगतृष्णा जल के समान है।
699 : - mrgatrshna jal ke samaan hai.
700 : - विनयरहित व्यक्ति की ताना देना व्यर्थ है।
700 : - vinayarahit vyakti kee taana dena vyarth hai.

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post

मूर्खों से विवाद || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 86

मूर्खों से विवाद || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 86

chanakya niti for success in life in hindi 426 : - अपने तथा अन्य लोगों के बिगड़े कार्यों का स्वयं निरिक्षण करना चाहिए। 426 : - apane tatha any logon

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 11

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 11

chanakya video 51 : - किसी से अपना काम निकालना हो तो मधुर वचन बोलें. जिस प्रकार हिरण का शिकार करने के लिए शिकारी मधुर स्वर में गीत गाता है.

दूसरों की रहस्यमयी बातों को || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 89

दूसरों की रहस्यमयी बातों को || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 89

441 : - विनाश का उपस्थित होना सहज प्रकर्ति से ही जाना जा सकता है। 441 : - vinaash ka upasthit hona sahaj prakarti se hee jaana ja sakata hai.