चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakya Niti Motivation भाग 127

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakya Niti भाग 127

chanakya niti for motivation

631 : - प्रिय वचन बोलने वाले का कोई शत्रु नहीं होता।
631 : - priy vachan bolane vaale ka koee shatru nahin hota.
632 : - जो मांगता है, उसका कोई गौरव नहीं होता।
632 : - jo maangata hai, usaka koee gaurav nahin hota.
633 : - सौभाग्य ही स्त्री का आभूषण है।
633 : - saubhaagy hee stree ka aabhooshan hai.
634 : - शत्रु की जीविका भी नष्ट नहीं करनी चाहिए।
634 : - shatru kee jeevika bhee nasht nahin karanee chaahie.
635 : - बहुत पुराना नीम का पेड़ होने पर भी उससे सरौता नहीं बन सकता।
635 : - bahut puraana neem ka ped hone par bhee usase sarauta nahin ban sakata.

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