चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 13

चाणक्य के अनमोल विचार || Chaanaky Ke Anamol Vichaar – Part 13

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61 : - काम मनुष्य का सबसे बड़ा रोग है. अज्ञान या मोह सबसे बड़ा शत्रु है. क्रोध मनुष्य को जला देने वाली भयंकर अग्नि है तथा आत्मज्ञान ही परम सुख है.
61 : - kaam manushy ka sabase bada rog hai. agyaan ya moh sabase bada shatru hai. krodh manushy ko jala dene vaalee bhayankar agni hai tatha aatmagyaan hee param sukh hai. 
62 : - परमात्मा का ज्ञान होने पर देह का मोह मिट जाता है. तब मन जहाँ भी जाता है, वहीं समाधि लग जाती है.
62 : - paramaatma ka gyaan hone par deh ka moh mit jaata hai. tab man jahaan bhee jaata hai, vaheen samaadhi lag jaatee hai.

63 : - धार्मिक कथाओं को सुनने पर, श्मशान में और रोगियों को देखकर व्यक्ति कि बुद्धि को जो वैराग्य हो जाता है. यदि ऐसा वैराग्य सदा बना रहे तो भला कौन संसार के इन बंधनों से मुक्त नहीं होगा.

63 : - dhaarmik kathaon ko sunane par, shmashaan mein aur rogiyon ko dekhakar vyakti ki buddhi ko jo vairaagy ho jaata hai. yadi aisa vairaagy sada bana rahe to bhala kaun sansaar ke in bandhanon se mukt nahin hoga.

64 : - जो वस्तु दूर है, दुसाध्य है, वह सब ताप से साध्य है . तप सबसे प्रबल है.
64 : - jo vastu door hai, dusaadhy hai, vah sab taap se saadhy hai . tap sabase prabal hai.
65 : - जिसका हृदय सभी प्राणियों के लिए दया से परिपूर्ण है उसे ज्ञान, मोक्ष, जटा, भस्म- लेपन आदि से क्या लेना देना.

65 : - jisaka hrday sabhee praaniyon ke lie daya se paripoorn hai use gyaan, moksh, jata, bhasm- lepan aadi se kya lena dena.

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