चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 145

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 145
721 : - बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते।
721 : - buddhimaanon ke shatru nahin hote.
722 : - दान जैसा कोई वशीकरण मन्त्र नहीं है।
722 : - daan jaisa koee vasheekaran mantr nahin hai.
723 : - शत्रु की निंदा सभा के मध्य नहीं करनी चाहिए।
723 : - shatru kee ninda sabha ke madhy nahin karanee chaahie.
724 : - क्षमाशील व्यक्ति का तप बढ़ता रहता है।
724 : - kshamaasheel vyakti ka tap badhata rahata hai.
725 : - बल प्रयोग के स्थान पर क्षमा करना अधिक प्रशंसनीय होता है।
725 : - bal prayog ke sthaan par kshama karana adhik prashansaneey hota hai.

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