चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 143

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 143
711 : - असहाय पथिक बनकर मार्ग में न जाएं।
711 : - asahaay pathik banakar maarg mein na jaen.
712 : - पुत्र की प्रशंसा नहीं करनी चाहिए।
712 : - putr kee prashansa nahin karanee chaahie.
713 : - सेवकों को अपने स्वामी का गुणगान करना चाहिए।
713 : - sevakon ko apane svaamee ka gunagaan karana chaahie.
714 : - धार्मिक अनुष्ठानों में स्वामी को ही श्रेय देना चाहिए।
714 : - dhaarmik anushthaanon mein svaamee ko hee shrey dena chaahie.
715 : - राजा की आज्ञा का कभी उल्लंघन न करे।
715 : - raaja kee aagya ka kabhee ullanghan na kare.

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