चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 142

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakay Niti in Hindi भाग 142
706 : - विश्वासघाती की कहीं भी मुक्ति नहीं होती।
706 : - vishvaasaghaatee kee kaheen bhee mukti nahin hotee.
707 : - दैव (भाग्य) के अधीन किसी बात पर विचार न करें।
707 : - daiv (bhaagy) ke adheen kisee baat par vichaar na karen.
708 : - श्रेष्ठ और सुहृदय जन अपने आश्रित के दुःख को अपना ही दुःख समझते है।
708 : - shreshth aur suhrday jan apane aashrit ke duhkh ko apana hee duhkh samajhate hai.
709 : - नीच व्यक्ति ह्र्दयगत बात को छिपाकर कुछ और ही बात कहता है।
709 : - neech vyakti hrdayagat baat ko chhipaakar kuchh aur hee baat kahata hai.
710 : - बुद्धिहीन व्यक्ति पिशाच अर्थात दुष्ट के सिवाय कुछ नहीं है।
710 : - buddhiheen vyakti pishaach arthaat dusht ke sivaay kuchh nahin hai.

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