चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakya Niti भाग 133

चाणक्य के अनमोल विचार – Chanakya Niti भाग 133
661 : - इन्द्रियों को वश में करना ही तप का सार है।
661 : - indriyon ko vash mein karana hee tap ka saar hai.
662 : - स्त्री के बंधन से छूटना अथवा मोक्ष पाना अत्यंत कठिन है।
662 : - stree ke bandhan se chhootana athava moksh paana atyant kathin hai.
663 : - स्त्री का नाम सभी अशुभ क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।
663 : - stree ka naam sabhee ashubh kshetron se juda hua hai.
664 : - अशुभ कार्य न चाहने वाले स्त्रियों में आसक्त नहीं होते।
664 : - ashubh kaary na chaahane vaale striyon mein aasakt nahin hote.
665 : - तीन वेदों ऋग, यजु व साम को जानने वाला ही यज्ञ के फल को जानता है।
665 : - teen vedon rg, yaju va saam ko jaanane vaala hee yagy ke phal ko jaanata hai.

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