दूसरों की रहस्यमयी बातों को || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 89

दूसरों की रहस्यमयी बातों को || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 89
441 : - विनाश का उपस्थित होना सहज प्रकर्ति से ही जाना जा सकता है।
441 : - vinaash ka upasthit hona sahaj prakarti se hee jaana ja sakata hai.
442 : - अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।
442 : - adharm buddhi se aatmavinaash kee suchana milatee hai.
443 : - चुगलखोर व्यक्ति के सम्मुख कभी गोपनीय रहस्य न खोलें।
443 : - chugalakhor vyakti ke sammukh kabhee gopaneey rahasy na kholen.
444 : - राजा के सेवकों का कठोर होना अधर्म माना जाता है।
444 : - raaja ke sevakon ka kathor hona adharm maana jaata hai.
445 : - दूसरों की रहस्यमयी बातों को नहीं सुनना चाहिए।
445 : - doosaron kee rahasyamayee baaton ko nahin sunana chaahie.

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