एक अंग का दोष भी || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 79

एक अंग का दोष भी || चाणक्य नीति chanakya niti || भाग 79

Chanakya Neeti In Hindi

391 : - शत्रु का पुत्र यदि मित्र है तो उसकी रक्षा करनी चाहिए।
391 : - shatru ka putr yadi mitr hai to usakee raksha karanee chaahie.
392 : - शत्रु के छिद्र (दुर्बलता) पर ही प्रहार करना चाहिए।
392 : - shatru ke chhidr (durbalata) par hee prahaar karana chaahie.
393 : - अपनी कमजोरी का प्रकाशन न करें।
393 : - apanee kamajoree ka prakaashan na karen.
394 : - एक अंग का दोष भी पुरुष को दुखी करता है।
394 : - ek ang ka dosh bhee purush ko dukhee karata hai.
395 : - शत्रु छिद्र (कमजोरी) पर ही प्रहार करते है।
395 : - shatru chhidr (kamajoree) par hee prahaar karate hai.

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Chanakya Niti

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